सिरसी जिला संभल उत्तर प्रदेश में 30 मार्च को आल इंडिया मुशायरा: अदब-नवाज़ अवाम के बीच सजेगी शेर-ओ-शायरी की शानदार महफ़िल

 सिरसी की सरज़मीन अपनी सादगी में जितनी ख़ामोश नज़र आती है, उतनी ही अपनी रूह में अदब, इल्म और तहज़ीब की गहराइयाँ समेटे हुए है। यह वही मुक़द्दस बस्ती है जहाँ अल्फ़ाज़ की क़द्र की जाती है, जहाँ शेर-ओ-सुख़न महज़ अल्फ़ाज़ का खेल नहीं, बल्कि एहसासात का जश्न बन जाता है।

सिरसी की अदब-नवाज़ अवाम का ज़िक्र दरअसल उस रूहानी रवायत का ज़िक्र है, जो सदियों से इल्म और शायरी की शम्मा को रौशन रखे हुए है। यहाँ के लोग सिर्फ़ शायरी सुनते नहीं, बल्कि उसे महसूस करते हैं—हर मिसरे पर “वाह” और “मुक़र्रर” की सदाएँ इस बात की गवाही देती हैं कि यह शहर अदब की बारीकियों से भली-भाँति वाक़िफ़ है।

यहाँ की महफ़िलें महज़ इजलास नहीं होतीं, बल्कि दिलों के दरमियान एक ख़ूबसूरत रिश्ता क़ायम करती हैं। जब किसी मुशायरे में सिरसी की अवाम शिरकत करती है, तो हर शायर को ऐसा महसूस होता है मानो उसके अल्फ़ाज़ को समझने वाले दिलों का एक समंदर सामने मौजूद है। यही वजह है कि सिरसी की सरज़मीन पर पढ़ा गया हर शेर एक नई जान पा जाता है।

इल्मी एतिबार से भी सिरसी का मुक़ाम क़ाबिले-तारीफ़ है।

इल्मी एतिबार से भी सिरसी का मुक़ाम क़ाबिले-तारीफ़ है। यहाँ की फ़िज़ा में तालीम की ख़ुशबू रची-बसी है—मदारिस, मक़ातिब और तालीमी इदारे न सिर्फ़ इल्म की शमअ जलाते हैं, बल्कि नई नस्लों को अदब और अख़लाक़ की दौलत से भी मालामाल करते हैं। यही इल्मी विरासत सिरसी को एक ऐसा शहर बनाती है जहाँ तालीम और तहज़ीब साथ-साथ परवान चढ़ते हैं।

तहज़ीबी तौर पर सिरसी एक मुकम्मल आईना है, जिसमें गंगा-जमुनी रवायत की झलक साफ़ दिखाई देती है। यहाँ के लोग मोहब्बत, अदब और एहतराम के उसूलों पर क़ायम रहते हुए हर आने वाले का खुले दिल से इस्तक़बाल करते हैं। महफ़िलों की शाइस्ता रवायत, बुज़ुर्गों का एहतराम, और नौजवानों में इल्म-ओ-अदब का शौक़—ये सब मिलकर सिरसी को एक मुकम्मल तहज़ीबी मरकज़ बना देते हैं।

सिरसी की यही अदब-नवाज़ी, इल्मी रौनक और तहज़ीबी शान इस शहर को सिर्फ़ एक मुक़ाम नहीं, बल्कि एक एहसास बना देती है—ऐसा एहसास जो हर शायर, हर अदीब और हर ज़ौक़ रखने वाले दिल को अपनी तरफ़ खींच लेता है।

उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के ज़ेरे-एहतिमाम

एक शानदार और यादगार अदबी नशिस्त का एहतमाम किया जा रहा है, जिसमें फ़िक्र-ओ-फ़न की रौशनियाँ चारों तरफ़ बिखरेंगी।

30 मार्च 2026 की ख़ुशनुमा रात, ठीक 8 बजे से, आलइंडिया मुशायरा का ये पुर-शौक़ और शानदार इजलास इंडियन मैरिज हॉल, सिरसी में सजेगा—जहाँ अदब के चाहने वाले, शेर-ओ-शायरी के दिलनशीं लम्हों में डूबते नज़र आएँगे।

इस नूरानी महफ़िल की सदारत फ़न-ए-सुख़न के नामवर शख़्सियत जनाब अनवर कैफ़ी मुरादाबादी फ़रमाएँगे, जबकि मुख़्य अतिथि की हैसियत से जनाब कोसर अब्बास (चेयरमैन, सिरसी नगर पंचायत) अपनी मौजूदगी से महफ़िल को चार चाँद लगाएंगे।

महफ़िल के मेहमान-ए-ख़ास के तौर पर डॉक्टर नुजाहिद फ़राज़ मुरादाबादी तशरीफ़ लाएँगे, और मेहमान-ए-एज़ाज़ी के रूप में जनाब कशिश वारसी (सदर, फूफ़ी फाउंडेशन एवं एडिटर, ग्लोबल न्यूज़) अपनी शिरकत से इस अदबी जलसे को और भी वक़ार बख़्शेंगे। इसके अलावा, संभल के उस्ताद शायर जनाब मुनव्वर ताबिश संभली भी मेहमान-ए-एज़ाज़ी के तौर पर अपनी ख़ास मौजूदगी दर्ज कराएँगे।

इस महफ़िल-ए-सुख़न की निज़ामत का नाज़ुक और अहम फ़रीज़ा, ख़ुश-लहजे और पुर-तजुर्बा अंदाज़ में जनाब हकीम बुरहान संभली साहब अंजाम देंगे।

मुशायरे में जिन नामवर शोरा के क़लाम सुनने मिलेंगे 

शफ़ीक़ बरकाती 

शीबन क़ादरी अमरोहा,

निज़ाम नोशाही मुंबई,

डॉक्टर अनस इक़ान मेरठी,

अब्बास सिरसिवी,

मेहदी सिरसिवी,

और ताहिर संभली शामिल हैं—जो अपने अशआर से दिलों को रोशन करेंगे और महफ़िल को यादगार बना देंगे।

इस शानदार अदबी इजलास के कन्वीनर हैं जनाब एम. ए. खान, जबकि नायाब कन्वीनर के तौर पर जनाब शाकिर हुसैन इलाही और दानिश अज़ीज़ी अपनी बेहतरीन ख़िदमात अंजाम देते आ रहे हैं।

ये मुशायरा न सिर्फ़ शायरी का जश्न होगा, बल्कि तहज़ीब, ज़बान और अदब की एक ख़ूबसूरत झलक भी पेश करेगा—जहाँ हर शेर दिल में उतरकर एक नई दुनिया बसाएगा।ये भी पढ़ें 


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