Irfan: The Labourer from Delhi: एक गुमनाम आवाज़, जो ज़मीर-ए-क़ौम की तरजुमान बन गई
तवारीख़ का गहरा मुताला इस हक़ीक़त की ताईद करता है कि दुनिया की कोई भी समाजी, सियासी या फ़िक्री तहरीक़ महज़ अपने नारों, अपने इज्…
तवारीख़ का गहरा मुताला इस हक़ीक़त की ताईद करता है कि दुनिया की कोई भी समाजी, सियासी या फ़िक्री तहरीक़ महज़ अपने नारों, अपने इज्…
भूमिका हिन्दी साहित्य के आधुनिक इतिहास में कुछ ऐसे रचनाकार हैं जिनका महत्व केवल उनकी रचनाओं की संख्या या लोकप्रियता से निर्धारि…
डिजिटल दौर में अदबी विरासत का तहफ़्फ़ुज़ : ANTHOUGHT की ज़रूरत, नज़रिया और ज़िम्मेदारी मुक़द्दिमा इक्कीसवीं सदी ने इल्म हासिल कर…
कश्मीरी पंडित से उर्दू अदब के शाहकार तक: नसीम का सफ़र (1811–1845)
मुक़द्दिमा
पैदाइश और इब्तेदाई पसमंज़र (12-02-1957) - (24-02-2014)
करीब तीन बरस और कुछ माह पहले जब मैंने Anthought की बुनियाद रखी, तो यह महज़ एक Website का आग़ाज़ नहीं था, बल्कि अदब से मेरी एक …
15 मई 2026 को मरहूम उस्ताद शायर डॉ. ताहिर रज़्ज़ाक़ी की याद में "कुछ रुतें डॉ. ताहिर रज़्ज़ाक़ी के नाम" के उन्वान से …
इब्तिदाई ज़िंदगी अब्बास क़मर का जन्म 1 अगस्त 1994 को उत्तर प्रदेश के तारीख़ी और तहज़ीबी शहर जौनपुर में हुआ। जौनपुर अपनी इल्मी,…
15 मई 2026 की पुरसुकून और यादगार शाम, शब्बीर पैलेस अदब की रौशनी से जगमगा उठी, जब मशहूर-ओ-मारूफ़ उस्ताद शायर मरहूम डॉ ताहिर रज़्…
आज का दौर तेज़-रफ़्तार मालूमात, चंद सेकंड की वीडियोज़ और लम्हों में बदलती दिलचस्पियों का दौर है। सोशल मीडिया की चमक-दमक ने इंसान…
सिरसी की सरज़मीन अपनी सादगी में जितनी ख़ामोश नज़र आती है, उतनी ही अपनी रूह में अदब, इल्म और तहज़ीब की गहराइयाँ समेटे हुए है। …
अनीस अमरोहवी उर्दू अदब की उस ख़ामोश रिवायत के अमीन हैं, जहाँ फ़न की बुलंदी का शोर नहीं, बल्कि उसके असर की गूंज दिलों में देर तक…
उर्दू अदब की तारीख़ में कुछ शायर ऐसे भी गुज़रे हैं जिनकी शख़्सियत और फ़िक्र ने शायरी को नई राहें दिखाईं। क़ाज़ी मुहम्मद शमशाद …